पंजाब सरकार निजी स्कूलों की फीस काबू में रखने के लिए मानसून सत्र में लाएगी विधेयक
अभी लागू है अध्यादेश के प्रावधान

पंजाब की मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार निजी स्कूलों की फीस काबू में रखने के लिए 13 जुलाई से लागू अध्यादेश को स्थायी कानून में बदलने के लिए पंजाब विधान सभा के मानसून सत्र के दौरान ‘द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक, 2026’ लाएगी। विधेयक निजी स्कूलों के फीस ढांचे को सख्ती से विनियमित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को मनमाने ढंग से फीस वृद्धि के बोझ से सुरक्षा प्रदान करेगा।
पंजाब के 7,800 से अधिक निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस कानून का लाभ मिलेगा। इसे देश के सबसे सख्त फीस नियंत्रण ढांचों में से एक माना जा रहा है। भगवंत मान सरकार ने मनमानी वार्षिक फीस वृद्धि पर सख्त रोक लगाई है।, अतिरिक्त वसूली गई फीस की वापसी को अनिवार्य बनाया है और अधिकारियों को स्कूली खातों का फोरेंसिक ऑडिट करने का अधिकार दिया है, जो केवल कागजी निर्देशों की बजाय वास्तविक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार निजी स्कूल अब अपने स्तर पर वार्षिक 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक फीस वृद्धि के लिए जिला रेग्युलेटरी बॉडी से पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा, जो स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही दी जाएगी। यदि पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी स्कूल की कुल फीस वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक रही है तो अतिरिक्त वसूली गई राशि विद्यार्थियों और अभिभावकों को वापस करनी होगी, जिसमें कोई छूट नहीं होगी। फीस वृद्धि की सीमा की गणना के समय सभी अनिवार्य शुल्कों को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि स्कूल विभिन्न मदों के तहत फीस को बांटकर निर्धारित सीमा से परे न जा सकें। यह कानून किसी भी रूप में मुनाफाखोरी और कैपिटेशन फीस पर भी पूरी तरह रोक लगाता है।
इसके सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में एक जिला रेग्युलेटरी बॉडी का गठन किया गया है। प्रत्येक निजी स्कूल के लिए निर्धारित समय के भीतर शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पिछले चार वर्षों के फीस रिकॉर्ड अपलोड करना अनिवार्य है।रेग्युलेटरी बॉडी को अपने स्तर पर या अभिभावकों की शिकायतों के आधार पर स्कूल के खातों का फोरेंसिक ऑडिट करवाने का अधिकार है। अभिभावकों या विद्यार्थियों द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायतों की जांच और निर्णय एक निर्धारित समय के भीतर किया जाएगा, जिससे पहले संबंधित स्कूल को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
इस कानून में सख्त जुर्माने का प्रावधान है। पहली बार उल्लंघन करने पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि दूसरी बार उल्लंघन करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना होगा। बार-बार उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ स्कूल की मान्यता या संबद्धता रद्द की जा सकती है।
पारित होने के बाद, यह विधेयक वर्तमान अध्यादेश को पंजाब विधान सभा के एक स्थायी कानून में बदल देगा। पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों से फीस रिकॉर्ड एकत्र करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है और इन रिकॉर्डों की जांच जारी है। अब तक 6,500 से अधिक स्कूल अपने रिकॉर्ड जमा करवा चुके हैं। जांच पूरी होने के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों से अतिरिक्त वसूली गई फीस की वापसी के आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे।
इस बारे में पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “पंजाब ने देश के सबसे सख्त निजी स्कूल फीस नियंत्रण ढांचों में से एक फ्रेमवर्क लागू किया है, जिसमें केवल कागजी दिशा-निर्देश नहीं बल्कि सही मायने में फीस वृद्धि पर सख्त सीमा, अनिवार्य रिफंड और फोरेंसिक ऑडिट के प्रावधान शामिल हैं। 32 लाख से अधिक विद्यार्थी और उनके परिवार इस ऐतिहासिक सुधार का लाभ उठाएंगे। अध्यादेश 13 जुलाई से लागू है, जिसका मतलब है कि स्कूल 5 प्रतिशत फीस वृद्धि की सीमा और रिफंड की शर्तों से पहले ही बंधे हुए हैं। अभिभावकों को विधेयक के पारित होने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। पंजाब विधान सभा द्वारा पारित होने के बाद, यह विधेयक अध्यादेश को स्थायी कानूनी ताकत देगा। हमारी सरकार का रुख स्पष्ट है: शिक्षा एक लोक सेवा है, न कि कोई व्यावसायिक संस्थान जिसे मुनाफा कमाने के लिए चलाया जाए।”



