संजीव अरोड़ा की कंपनी हुई 2.77करोड़ की ठगी की शिकार,मामले में दर्ज कराई थी एफ आई आर

ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की कंपनी के साथ मोबाइल व अन्य सामान की खरीद फरोख्त करने वाली तीन कंपनियों ने 2.77 करोड़ रुपए की ठगी की। ठगी करने के बाद मंत्री की कंपनी जब उनसे पैसे मांगती थी तो वो उन्हें पुलिस के नाम पर धमकाते रहे।
मंत्री अरोड़ा की कंपनी की तरफ से अंकुर गुप्ता ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी और 17 मई 2025 को इस संबंध में थाना फोकल पॉइंट में एफआईआर दर्ज की गई। जब कंपनी ने ठगी करने वाली तीन कंपनियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करवाई उस समय संजीव अरोड़ा राज्यसभा सदस्य थे और दो महीने बाद पंजाब सरकार में मंत्री बन गए थे।
संजीव अरोड़ा पर मोबाइल फोन और अन्य सामान की खरीद-फरोख्त में जीएसटी में हेराफेरी करने के आरोप हैं। 9 मई को ईडी उन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई।
संजीव अरोड़ा की कंपनी का दावा है कि वो पाक-साफ हैं और उनके साथ जीएसटी को लेकर जो ठगी हुई उसके संबंध में पहले एफआईआर दर्ज करवाई है। वहीं भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन का कहना है कि अगर वो फर्जी कंपनियां थी, तो उनसे खरीदफरोख्त क्यों की। वहीं मंत्री ने पुलिस से इस संबंध में क्या कार्रवाई करवाई उसके बारे में भी स्पष्ट करना चाहिए। कंपनी के डायरेक्टरों ने पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत में कहा है कि कंपनी का नाम मेसर्स रितेश प्रॉपर्टी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड से बदलकर मेसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड कर दिया गया है। कंपनी के डायरेक्टर्स ने अंकुर गुप्ता को शिकायत करने व केस लड़ने के लिए अधिकृत किया है।
शिकायत में मंत्री की कंपनी की तरफ से अंकुर गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद-बिक्री का काम करती है। काम के दौरान तीन अलग-अलग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने उनकी कंपनी से संपर्क किया और खुद को एप्पल आई-फोन और उसके सामान का व्यापारी बताया। उन्होंने कहा कि बाजार में उनकी अच्छी साख है।आरोपियों की बातों में आकर कंपनी ने उनसे एप्पल आई-फोन और सामान खरीदा। आरोपियों ने यह भी बताया कि उनके पास वैध जीएसटी लाइसेंस नंबर हैं। अंकुर गुप्ता ने बताया कि मेसर्स एस.के. एंटरप्राइजेज का मालिक कमल अहमद है और अपनी फर्म के हर काम और व्यवहार के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। मेसर्स ग्लोबल ट्रेडर्स का मालिक अजहर हैदर है और बिजनेस के रोजमर्रा के हर काम के लिए जिम्मेदार है। मेसर्स जी.एम.जी. ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड व उनके दो डायरेक्टरों रजत व शीतल के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी।
शिकायत में कुल पांच को आरोपी बनाया गया है। अंकुर गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी ने आरोपियों से अलग-अलग बिलों के बदले एप्पल आई-फोन खरीदे थे और सभी बिलों का भुगतान कंपनी ने कर दिया है। यह भुगतान कंपनी के बैंक खातों और स्टेटमेंट में साफ तौर पर दिखाया गया है। कंपनी ने इन बिलों के बदले सारा पैसा चुका दिया था। कंपनी पर कुछ भी बकाया नहीं है। सभी आरोपियों ने कंपनी से जीएसटी (एसजीएसटी और सीजीएसटी) चार्ज भी लिया है जो बिलों में दिखाया गया है और कंपनी ने उस जीएसटी का भुगतान किया था। कंपनी के खातों को देखने से पता चलता है कि कंपनी ने जीएसटी के साथ पूरी रकम चुका दी है।
अंकुर गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी के पास वैध जीएसटी लाइसेंस नंबर है। जीएसटी का मंथली रिटर्न भरते समय, कंपनी आई-फोन की बिक्री के बदले आरोपियों द्वारा जारी बिलों पर पहले से चुकाए गए जीएसटी का रिफंड पाने में नाकाम रहीआईजीएसटी दावा न मिलने के कारण, कंपनी ने जीएसटी कानून के तहत रिफंड के लिए अर्जी दी। आरोपियों की फर्मों से की गई खरीद की वजह से इस रिफंड को जीएसटी विभाग ने रद्द कर दिया।अंकुर गुप्ता ने बताया कि जीएसटी ने तीन आदेश जारी किए। अगस्त में जारी आदेश में डिपार्टमेंट ने कहा कि मेसर्स एस.के. एंटरप्राइजेज के 8,27,794 रुपए, मेसर्स ग्लोबल ट्रेडर्स के 8,73,814 रुपए, मेसर्स जी.एम.जी. ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के 83,90,287.83 रुपए रद्द किए गए। सितंबर में मेसर्स एस.के. एंटरप्राइजेज के 8,51,949 रुपए और मेसर्स ग्लोबल ट्रेडर्स के 20,57,018 रुपए रद्द किए गए। इसी तरह अक्तूबर में मेसर्स एस.के. एंटरप्राइजेज के 1,47,60,793 रुपए रद्द किए गए।
दो कंपनियों पर हुई कार्रवाई: शिकायत में कहा है कि धोखाधड़ी करने वाली दो कंपनियों पर कार्रवाई हुई। मेसर्स एस.के. एंटरप्राइजेज और मेसर्स ग्लोबल ट्रेडर्स का जीएसटी लाइसेंस रद्द कर दिया गया। वहीं तीसरी कंपनी मेसर्स जी.एम.जी. ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड में भी गड़बड़ी पाई गई। जीएसटी विभाग के बुलाने के बावजूद वे अपनी खरीद की सच्चाई नहीं बता पाए। लेनदेन होने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की और कंपनी के रिफंड को भी ब्लॉक कर दिया गया है।
अंकुर गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी ने आरोपियों से खरीदे गए मोबाइल विदेशों में बेचे। आरोपियों से 43 बार फोन खरीदे गए। जीएसटी विभाग के मुताबिक इन फर्मों ने कागजों पर उन लोगों से खरीद दिखाई है जो असल में हैं ही नहीं। लेकिन उन्होंने मंत्री की कंपनी को माल बेचा और जीएसटी के साथ पूरा पैसा लिया। बाद में विभाग से आदेश मिलने पर पता चला कि सभी आरोपियों ने आपस में मिलकर और गलत इरादे से बिलों में जीएसटी लगाकर कंपनी को गुमराह किया। कंपनी को नुकसान पहुंचाकर खुद फायदा कमाया।
अंकुर गुप्ता ने शिकायत में कहा है कि आरोपियों ने आपस में मिलकर कंपनी के साथ धोखाधड़ी की। पहले से योजना बनाकर कंपनी के साथ कुल 2,77,61,655 रुपए की भारी ठगी की। कंपनी ने कई बार आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की और उनसे गलत तरीके से लिया गया जीएसटी पैसा वापस मांगा। लेकिन आरोपी कंपनी को अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।शिकायत में अंकुर गुप्ता ने कहा कि आरोपी कंपनियों के प्रतिनिधियों से जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो उन्होंने कहा कि उनके पुलिस वालों के साथ अच्छे ताल्लुकात हैं और वो उनके खिलाफ कार्रवाई करवा देंगे। उनका कहना है कि सभी आरोपी फर्जी बिल और कागज बनाने के भी दोषी हैं। इन बातों से साफ है कि आरोपियों ने साजिश रचकर, झूठ बोलकर और फर्जी कागजों के जरिए कंपनी को नुकसान पहुंचाया और खुद गलत तरीके से फायदा उठाया।
कंपनी की तरफ से पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी गई। पुलिस कमिश्नर ने इसकी जांच डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन) को सौंपी। डीसीपी के आदेश पर आरोपी कमल अहमद, अजहर हैदर, रजत मदान और शीतल मदान के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश के तहत लुधियाना के थाना फोकल पॉइंट में 17 मई 2025 को एफआईआर दर्ज की गई।
एफ आई आर पर कार्रवाई को लेकर थाना फोकल पॉइंट के एसएचओ इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह का कहना है कि वो देखकर बताएंगे। लेकिन उसके बाद उन्होंने बात नहीं की। एसीपी इंद्रजीत का कहना है कि इस बारे में सीनियर अफसर ही कुछ बताएंगे। वहीं एडीसीपी-4 जशनदीप गिल का कहना है कि उनकी पोस्टिंग यहां पर बाद में हुई। इसलिए उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है।


