अंबाला में वार्ड प्रत्याशियों के चयन में बीजेपी ने जीत का मंत्र जपते हुए दल बदलुओ को भी नवाजा

अंबाला नगर निगम के वार्ड पार्षद प्रत्याशियों में भाजपा ने जिताऊ का चयन किया है। भाजपा ने अंबाला के 20 वार्डों के प्रत्याशियों की सूची जारी की। इन प्रत्याशियों का चयन जीत की क्षमता के आधार पर किया गया है।
इस चयन में पुराने चेहरों की वापसी, विपक्ष से आए नेताओं को मौका और नए चेहरों पर दाव भी लगाया गया है।
प्रत्याशियों की सूची में 11 प्रत्याशी पिछला चुनाव लडने वाले है। इनमें से दो प्रत्याशी हार गए थे।बाकी नौ जीतने वालों में एक कांग्रेस और एक हरियाणा जनचेतना पार्टी से है। जनचेतना पार्टी का भाजपा में विलय हो गया था और शेष 7 भाजपा से ही थे।
भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में आने के बाद मुकाबले का आकलन किया जा रहा है। हर वार्ड में समीकरण अलग हैं । कहीं जातीय गणित, कहीं व्यक्तिगत पकड़, तो कहीं विकास के मुद्दे चुनाव की दिशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव एक तरह से मिश्रित माडल बन गया है जहां पुराने नेता, नए चेहरे और दल-बदल की राजनीति एक साथ मैदान में है।
भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने वाले सातों चेहरों को दोबारा मैदान में उतारकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अपने जिताऊ आधार को पूरी तरह छोड़ने के तैयार नहीं है। इस सूची के अनुसार दल बदलने वालों के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। कांग्रेस से आए राजेश मेहता, हरियाणा जनचेतना और हरियाणा डेमोक्रेटिक मोर्चों से जुड़े चेहरे, अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
यह रणनीति साफ करती है कि भाजपा इस बार वोट बैंक का जुगाड़ करने की कोशिश कर रही है।यानी जहां संगठन कमजोर है, वहां विपक्ष के मजबूत चेहरों को शामिल कर सीधे मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी है।लेकिन भाजपा का यह दांव जोखिम भरा भी है स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और बगावत का खतरा भी उतना ही बड़ा है। पांच पूर्व पार्षदों को टिकट नहीं मिली। इनमें से एक ने तो खुद नामांकन नहीं भरा था, एक ने नामांकन भरा था लेकिन चुनाव नहीं लड़ने की बात भी खुद ही कह दी थी।
तीन ऐसे हैं जिन्होंने टिकट मांगी थी लेकिन नहीं मिली। इनमें से एक भाजपा का सबसे पुराना चेहरा भी शामिल है जबकि दो चेहरे हरियाणा जनचेतना से चुनाव जीतने वाले पूर्व पार्षद हैं। लेकिन इनके बदले भाजपा ने इसी पार्टी से जुड़े बाद और अब भाजपा का हिस्सा बने दो अन्य उम्मीदवारों को टिकट देकर संतुलन भी साधने का काम किया है।
सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो सीधे तौर पर नहीं, लेकिन रिश्तों के जरिए राजनीति में उतर रहे हैं। शिवानी सूद और दिनेश सूद, गुरप्रीत साहनी जैसे उदाहरण बताते हैं कि पार्टी अब रिश्ते को भी चुनावी पूंजी मान रही है। यह रुख बताता है कि स्थानीय पहचान और नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है, चाहे उम्मीदवार खुद पहली बार मैदान में क्यों न हो।
टिकट वितरण में अलग-अलग गुटों का संतुलन भी नजर आता है। कार्तिकेय शर्मा गुट से जुड़े दो उम्मीदवारों को टिकट मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अंदरूनी समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
करीब 9 नए चेहरों को टिकट देकर भाजपा ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ पुराने फार्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती। विशाल राणा, वरखा सहोता, वरिंद्र नाथ, गुरविंद्र सिंह, कविता सैनी, कमल अग्रवाल, बीनू गर्ग, सपना रानी, राजकुमार गुप्ता उम्मीदवारों को मौका देकर पार्टी ने नए चेहरे का कार्ड भी खेला है।



