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मुझे एफ आई आर की कॉपी का इंतजार_संदीप पाठक

राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिला

आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक ने अपने खिलाफ पंजाब में गैर जमानती धाराओं में दो एफ आई आर दर्ज होने के मामले में चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा- ऐसी खबरें चल रही हैं, लेकिन मुझे इस तरह की किसी एफ आई आर की जानकारी नहीं है। मुझे जब इनकी जानकारी दी जाएगी, तब मैं कोई जवाब दे पाऊंगा।

दूसरी ओर पंजाब की यह राजनीति राष्ट्रपति भवन पहुंच गई है। अब पांच मई को पंजाब सीएम भगवंत मान से पहले भाजपा सांसद राघव चड्ढा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस मुलाकात में पंजाब सरकार पर सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग, राजनीतिक बदले की भावना और हाल ही में आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों के खिलाफ टारगेटेड कार्रवाई का मुद्दा उठाएंगे। राष्ट्रपति ने 5 मई को सुबह 10:40 बजे राघव चड्ढा और 3 अन्य सांसदों को मिलने का समय दिया है। इसी दिन सीएम भगवंत मान को भी राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिला है।

राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने कहा- कल से टीवी चैनलों पर चल रहा है कि पंजाब में मेरे खिलाफ दो एफ आई आर दर्ज हुई हैं। मुझे अब तक इन एफ आई आर को लेकर कोई औपचारिक या अनौपचारिक जानकारी नहीं मिली है। मैं एफ आई आर की कॉपी मिलने का इंतजार कर रहा हूं ताकि उसका जवाब दे सकूं। अभी तक मुझे एफ आई आर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा- अगर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर एफ आई आर दर्ज की गई है तो पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही मैं इसका जवाब दे पाऊंगा। जो लोग मुझे जानते हैं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया है, चाहे वे वॉलंटियर्स हों या नेता, वे जानते हैं कि मैं सिद्धांतों और नैतिकता के आधार पर राजनीति करता हूं। जब तक मैं आप में था, तब भी सिद्धांतों के साथ काम किया। आज मैं भाजपा में हूं और आगे भी उसी तरीके से काम करूंगा।

राजनीति में सफलता या असफलता मेरे लिए मायने नहीं रखती। मेरे लिए जरूरी है कि मैं अपना राजनीतिक धर्म न तोड़ूं। मैंने आप किसी निजी कारण से नहीं छोड़ी, बल्कि विचारधारा और काम करने के तरीके को लेकर लंबे समय से मतभेद थे।

शनिवार को केस दर्ज होने की खबर सामने आते ही संदीप पाठक दिल्ली स्थित अपने घर के पिछले दरवाजे से निकल गए थे। दावा किया गया कि जिस गाड़ी में बैठकर संदीप निकले, वह राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के नाम पर रजिस्टर्ड है। गाड़ी पर नंबर भी जालंधर का है। हालांकि, शनिवार का पूरा दिन गुजरने के बाद भी पंजाब पुलिस, सरकारी प्रवक्ता और आप के प्रवक्ताओं ने इस एफ आई आर को लेकर कुछ नहीं कहा। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने सांसद संदीप पाठक के दिल्ली स्थित घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी है। यह चर्चा होती रही कि पंजाब पुलिस की 3 से 4 टीमें दिल्ली गई हैं, जिनमें विजिलेंस की टीम भी शामिल है। इस मामले में पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया की भी एंट्री हो गई। उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से कहा- जो भी हो, अगर यह नियमों के अनुसार है तो ठीक है। अगर नहीं, तो हम एक टीम बनाकर इसकी जांच करेंगे।

राघव चड्‌ढा ने आप छोड़ी तो पंजाब सरकार ने उनकी जेड प्लस सिक्योरिटी वापस ले ली। चड्‌ढा को पंजाब पुलिस की तरफ से सिक्योरिटी मिली हुई थी। इसके बाद कुछ देर के लिए दिल्ली पुलिस ने राघव चड्‌ढा को सिक्योरिटी दी। अब उन्हें सी आर पी एफ से सुरक्षा मिल गई है।पूर्व क्रिकेटर व राज्यसभा सांसद को पंजाब पुलिस की तरफ से वाई कैटेगरी की सिक्योरिटी दी गई थी। उनके पार्टी छोड़ने और भाजपा सांसदों की लिस्ट में नाम शामिल होने के बाद पंजाब पुलिस ने सुरक्षा हटा ली। इसके बाद तुरंत दिल्ली से सी आर पी एफ के 7 जवान उनके घर पहुंचे। हरभजन ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से जवाब मांगा कि किस आधार पर सिक्योरिटी हटाई गई?

करीब 5 हजार करोड़ के टर्नओवर वाले ट्राइडेंट ग्रुप के मालिक राजिंदर गुप्ता की बरनाला के धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने रेड की। इसके खिलाफ गुप्ता पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। जिसके बाद कोर्ट ने 4 मई तक गुप्ता पर किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।

साल 2016 में संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में कदम रखा। संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी पकड़ जल्द ही पार्टी के भीतर साफ दिखने लगी। खासकर 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आप को मिली प्रचंड बहुमत वाली जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम कारणों में गिना गया।इस सफलता के बाद पार्टी ने उन्हें अप्रैल 2022 में पंजाब से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना। उसी साल दिसंबर में संदीप पाठक को पार्टी का राष्ट्रीय संगठन महासचिव नियुक्त किया गया।

इसके साथ ही उन्हें पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय, यानी राजनीतिक मामलों की समिति का सदस्य भी बनाया गया, जहां से वे संगठन और चुनावी फैसलों में अहम भूमिका निभाते रहे।

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