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भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाई कोर्ट का गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण के आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी कांग्रेस की नियमितीकरण वाली नीति पर मुहर लगा चुका है। अब उसी नीति के तहत गेस्ट टीचर्स के पक्का होने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में सरकार को बिना देरी के कोर्ट के फैसले को लागू करना चाहिए।

हुड्डा ने गेस्ट टीचर्स को बधाई देते हुए खुशी जताई कि हाई कोर्ट के फैसले ने बीजेपी सरकार के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। बीजेपी द्वारा बार-बार झूठ फैलाया गया कि इन टीचर्स की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध हुई थी। जबकि कांग्रेस सरकार ने उस समय स्कूलों की जरूरतों को पूरा करने, शिक्षा के स्तर को सुधारने व सभी स्कूलों में पर्याप्त टीचर्स मुहैया करवाने के लिए यह कदम उठाया था। इसके लिए उचित प्रकिया और मानदंडों की पालना की गई थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सरकार द्वारा 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को बनाई गई नियमितीकरण नीतियों को पूरी तरह उचित ठहराते हुए, इसके तहत कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का रास्ता खोल दिया था। उसी फैसले व नीति के आधार पर गेस्ट टीचर्स को यह लाभ मिलने जा रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2014 में कच्चे कर्मचारियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया था। लेकिन सत्ताधारी बीजेपी ने बार-बार इस नीति पर सवाल उठाए और कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ की कोशिश की। लेकिन कोर्ट के फैसले से हरियाणा के हजारों कच्चे कर्मचारियों की नौकरी अब पूरी तरह सुरक्षित हो गई है। लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्मचारियों पर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है।

हुड्डा ने कहा कि एकतरफ जहां कांग्रेस सरकार की नीति को अदालत ने उचित करार दिया है, वहीं बीजेपी सरकार द्वारा लागू की गई कोई भी नीति अदालत में ठहर नहीं पाई। ना तो ये सरकार पक्की नौकरियां दे पा रही है और ना ही कौशल निगम के तरत भर्ती किए जा रहे कच्चे कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित कर पा रही है। जबकि बीजेपी ने चुनाव में झूठा वादा करके 1.25 कच्चे कर्मचारियों के परिवारों से वोट लिया था। हुड्डा ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट और अब हाई कोर्ट का फैसला हरियाणा के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये ना केवल कच्चे कर्मचारियों के हजारों परिवारों के लिए राहत की सांस है, बल्कि न्याय की जीत भी है।

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