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हरियाणा में अगले साल से बंद होगी मैनुअल एसीआर प्रणाली

डिजिटल परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम बनेगा

हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार अब कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज की निगरानी डिजिटल तरीके से करेगी। इसके लिए संशोधित एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) फ्रेमवर्क और डिजिटल परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों एवं निगमों, विश्वविद्यालयों तथा जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार अब पारंपरिक एसीआर व्यवस्था को धीरे-धीरे पूरी तरह डिजिटल ने बदला जाएगा। विभागवार ऐसे नए एसीआर प्रारूप तैयार किए जाएंगे, जिनमें कर्मचारियों के कार्यों, उपलब्धियों और प्रदर्शन को मापने योग्य तथा परिणाम-आधारित तरीके से दर्ज किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार ने सभी विभागों से उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिनके स्तर पर एसीआर सबसे ज्यादा लंबित पड़ी हैं। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य एसीआर लम्बन को खत्म कर अधिक जवाबदेही और समयबद्ध मूल्यांकन सुनिश्चित करना है।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अप्रैल 2027 से मैनुअल एसीआर प्रणाली पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसके बाद सभी मूल्यांकन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होंगे। एनआईसी अथवा नामित तकनीकी टीम एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करेगी, जो कर्मचारियों के कार्य निष्पादन और उपलब्धियों को सीधे एसीआर प्रणाली से जोड़ेगा। यह पूरी व्यवस्था एचआरएमएस पोर्टल से एकीकृत रहेगी। इससे कर्मचारियों के कार्य का वास्तविक समय में आकलन संभव हो सकेगा।

मुख्य सचिव की वेबसाइट पर एक विशेष “ऑनर बोर्ड” विकसित किया जाएगा, जिसमें निर्धारित मानकों के आधार पर कर्मचारियों की प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग प्रदर्शित की जाएगी। यह व्यवस्था राज्य, जिला और खंड स्तर तक लागू की जाएगी। इसके तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ कमजोर प्रदर्शन वाले कर्मचारियों की रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी।सरकार का मानना है कि नई डिजिटल एवं प्रदर्शन-आधारित एसीआर प्रणाली से प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा कर्मचारियों में बेहतर कार्य संस्कृति और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा मिलेगा।

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