पंजाब में वीडियो और फिल्म के सहारे आने वाले विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश
विवाद में केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्टू की चुनौती

पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव वीडियो और फिल्म जैसे माध्यमों से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।हाल में मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक अवमानना करते दिखाने वाले वीडियो को लेकर राजनीति चल रही थी। विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा वीडियो को वास्तविक बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे तो सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी वीडियो को फर्जी करार दे रही थी। इस वीडियो की वास्तविकता पर बहस के बीच ही फिल्म सतलुज के प्रदर्शन पर रोक को लेकर विवाद गहरा गया है।फिल्म में लापता हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा द्वारा पेश कहानी के आधार पर पंजाब में नब्बे के दशक में करीब 25 हजार युवकों को पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में मारकर गुप्त अंतिम संस्कार करना बताया गया है।फिल्म के प्रदर्शन पर ओटीटी प्लेटफार्म समेत सभी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।अब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इस रोक के पीछे भाजपा,कांग्रेस और अकाली दल की साजिश करार देते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दे रही है।
फिल्म का निर्माण दिलजीत दोसांझ ने किया है। सतलुज विवाद में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘कदम रख दिया है। बिट्टू ने सतलुज’ फिल्म के निर्माताओं को खुली चुनौती दी है। बिट्टू ने निर्माताओं को कहा कि उन 25,000 लापता या अवैध रूप से दाह-संस्कार किए गए शवों के पुख्ता दस्तावेजी सबूत, आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करें, जो फिल्म में दिखाए गए हैं। बिट़्टू ने कहा है कि उन्हें इन तथ्यों की प्रमाणिकता पब्लिक के सामने रखनी होगी, नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिट्टू ने कहा कि अगर निर्माता ये दस्तावेज पेश कर देते हैं तो वो सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे। बिट्टू लगातार फिल्म निर्माताओं के खिलाफ तथ्य पेश करते जा रहे हैं। एक दिन पहले उन्होंने फिल्म निर्माताओं को चैलेंज किया था कि वह पटियाला की सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल निर्मल कांता पर फिल्म बनाकर दिखाएं जिसकी हत्या आतंकियों ने छात्रों के सामने कर दी थी।
बिट्टू ने कहा कि ‘सतलुज’ के निर्माता विवादित दावों को इतिहास बताकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने नहीं छिप सकते। पंजाब का दर्दनाक अतीत कोई ऐसी पटकथा नहीं है, जिसे किसी खास कहानी का रूप देने के लिए चुनिंदा रूप से संपादित किया जाए।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि अगर 25 हजार शवों का यह आंकड़ा महज एक अनुमान या आरोप पर आधारित है, तो इसे ऐतिहासिक सच क्यों बताया गया? दर्शकों को यह क्यों नहीं बताया कि इस संख्या को किसी भी अदालत ने अंतिम रूप से सही नहीं माना है। बिट्टू ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा बेरहमी से मारे गए निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों के नरसंहार को फिल्म में वैसी तीव्रता के साथ क्यों नहीं दिखाया गया? बिट्टू ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुए पंजाब पुलिस के जवानों और सुरक्षा बलों के सर्वोच्च बलिदान को फिल्म में कम करके क्यों आंका गया है? पीड़ित परिवारों को कहानी से गायब क्यों कर दिया गया? इतिहास के केवल एक पक्ष को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और दूसरे पीड़ितों को हाशिए पर धकेलना गलत है। किसी भी फिल्म निर्माता को विवादित आंकड़ों को अचूक सच बनाकर इतिहास को विकृत करने का हक नहीं है।
केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा कि पंजाब ने आतंकवाद के काले दौर में बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। हर निर्दोष पीड़ित न्याय और सम्मान का हकदार है चाहे उसका धर्म, समुदाय या विचारधारा कुछ भी हो।
उन्होंने फिल्म मेकर्स से कहा है कि वे एक तय समय सीमा के भीतर इस 25,000 के आंकड़े का दस्तावेजी आधार सार्वजनिक करें। बिट्टू ने कहा कि अगर उनके पास सबूत नहीं हैं तो पंजाब की जनता से माफी मांगें।उल्लेखनीय है कि बिट्टू स्वयं आतंकवाद की पीड़ा झेल चुके हैं।बिट्टू के दादा बेअंत सिंह की पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर रहते आतंकवादियों ने विस्फोट कर हत्या कर दी थी।


